Sunday, 18 August 2013

Am I an Indian ?


भारत को आज़ाद हुए 67 साल हो गए हैं पर आज भी हम भारतीय होने से पहले बिहारी, मराठी, गुजराती, तमिल इत्यादि हैं| आज भी हम उत्तर या दक्षिण भारतीय हैं| जिस समय सरदार पटेल और वी. पी. मेनेन भारत के अनेकों टुकड़ों को मिलाने की कोशिश कर रहे थे उस समय उन्होंने यह कलपना भी नहीं की होगी के वो सिर्फ भूमिखंड को ही मिला रहे हैं, लोगों की मानसिकता को नहीं।
 
मेरे कॉलेज में एक चाय की दुकान है जिसके मालिक श्री संपत लाल हैं लेकिन वे ख़ुद को 'SAM' कहलाना पसंद करते हैं| उन्हें अगर आप भैया कह के संबोधित करें तो वे बुरा मान जाते है। लखनऊ जैसी जगह से आने की वजह से शुरू शुरू में उन्हें 'SAM' बुलाना बहुत मुश्किल होता था पर जैसे जैसे वक़्त बीता मैं भी उन्हें इसी नाम से पुकारने लगा. 'SAM' सभी विद्यार्थियों के साथ ऐसे पेश आते हैं जैसे की वो उन्ही की आयु के हों, हँसी-मजाक भी कुछ उसी अंदाज़ में चलता रहता है उनके साथ|

कुछ २ दिन पुरानी बात है यह, मैं उनके पास चाय लेने गया, वे कुछ खुद में ही मगन से थे और मैं भी कुछ दोस्तों के साथ इठलाया सा घूम रहा था| उनके एक दो बार न सुनने पर उनके अनोपचारिक मिजाज़ का फायदा उठाते हुए चुटकी बजा के उन्हें बुलाना चाहा। उन्हें यह बात बिलकुल भी पसंद नहीं आई और वे रोषित हो उठे. कुछ आपत्ति जनक बातें भी कह डाली पर क्योंकि वो मुझसे बड़े हैं मैंने कुछ नहीं कहा,  बात मज़ाक में टाल दी पर शायद उस दिन 'SAM' के अन्दर के श्री संपत लाल जाग उठे थे, वे कुछ और भी बोले पर अब मेरा भी इठलाना कम होने लगा था| लखनऊ का हो कर कोई और मुझे तमीज की तालीम दे रहा था यह शायद मेरे अहम् को रास न आया| 

इस सब गहमा गहमी के बीच वे बोले, "don't behave like cheap biharis" (सस्ते बिहारियों की तरह न पेश आओ)| यह  बात कुछ चुभ सी गयी मुझे। मेरी किसी हरकत से किसी राज्य या उसके लोगों को कैसे जोड़ा जा सकता है? आखिर ऐसा क्या ज़्यादा है गोवा के लोगों में जो बिहार वासियों में नहीं? वे भी तो उतने ही भारतीय हैं जितना कोई और| उन्होंने ने भी भारत की आज़ादी या उसके विकास में उतना ही योगदान दिया है जितना किसी और ने| बल्कि मुझे कोई हिचक नहीं है यह कहने में कि शायद बाकियों से थोड़ा ज़्यादा ही दिया होगा। आखिर अखिल भारतीय सेवाओं में वे एक अरसे से बाकि किसी भी राज्य से कहीं आगे हैं|

बात यहाँ यह नहीं है के कौन ज़्यादा महान है, बात यह है कि यह विचार
कितनी बड़ी प्रलय ला सकता है इसकी कलपना करना भी मुश्किल है| भारत देश तो वैसे भी एक बहुत ही झल्ली दार विचारधारा  'अनेकता में एकता" पर बुना हुआ है और "cheap  biharis" जैसे विचार के बीज इसे मिनटों में अलग-थलग कर सकते हैं| मेरी तो बस आप से एक ही विनती है कि लोगों को उनकी भाषा, उनके पहनावे अथवा उनके जन्म स्थान के तराजू में रख के न तौले। सदैव याद रखे कि हम सब इस महान भारत भूमि पर जन्में हैं और हम सब एक हैं| अगर कोई राज्य या उसके लोग किसी दुसरे राज्य से पिछड़े हैं तो यह हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने भाईयों की हर मुमकिन सहायता करें और उन्हें बराबरी में लायें। हमेशा याद रखें के विश्व में हमारा वजूद गोवा या बिहार से नहीं बल्कि भारत से है|

अगर अपना ना सही तो अपनी आने वाली पीढ़ी का ख्याल करे, कि उन्हें भी उतना ही महान और अखंड भारत देखने को मिले जो आपके पूर्वज आपके लिए छोड़ के गए थे|

2 comments:

  1. The comment 'Cheap Biharis' emanates from the hard fact that Bihar is far below the per capita average of National income, education, health and other surrogate variables. In fact this was Laaloo who in his urge to capture media attention, projected Biharis as a subject matter of mockery and destroyed their image systematically during his 15 years of rule. Moreover the laborious Biharies are being taken as a potential threat for all laid back Maharashtrians / Bangaloreans. They are ridiculing them for their own vested political reasons. We can see the best parallel example of it in the Western world where Indian software gurus are termed as Computer coolies out of sheer frustration. So take it lightly. Bihar is changing and changing fast. Gone are the days of Laloo- Rabri. People in Bihar have well understood their genuine concerns and they are coming up. Just wait Mr. SAM.

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  2. Very true. But the aim of the article is to demolish this very approach of biharis, marathis, banglorians etc.. It is about being an Indian first.

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