Sunday, 23 April 2017

भाव शून्यता

मेरे मोबाइल पर गूगल न्यूज़ का नोटिफिकेशन आया, लिखा था "Tamil farmers drink urine on the 40th day of protest at Jantar Mantar"। यह सुर्खी पढ़ के सच कहूँ तो पहले घिन सी आयी, सोचा कोई ऐसा क्यों करेगा? थोड़ा और पढ़ा तो याद आया यह वही लोग हैं जो कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने नग्न हो गये थे। थोड़ी और रूचि बढ़ी तो सोचा इस खबर का वीडियो देख के पूरा मसला समझ लिया जाये। 



गूगल पर आसानी से कुछ नहीं मिला तो सोचा रवीश जी ने ज़रूर कुछ ख़बर चलायी होगी इस पर। २ प्राइम टाइम वीडियो मिले - एक अभी कल ही का था। इस वीडियो में किसानों द्वारा ४० दिन में हर दिन अपनाये गए प्रदर्शन के असाधारण तरीकों का वर्णन था। गले में मरे हुए किसानो के कंकाल की माला पहनना, दिल्ली रेलवे स्टेशन से चूहे उठाकर उन्हें मुँह में दबाना, सकड़ पे चावल बिछा के खाना, नग्न हो जाने से लेकर मूत्र पी लेने तक सब शामिल था। 

तमिल नाडु में इस बार सूखे ने पिछले १४० वर्षों का कीर्तिमान तोड़ दिया और कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी का पानी ना छोड़े जाने से किसानों की हालात पूरी तरह चरमरा गयी। अक्टूबर से दिसंबर के बीच में १४४ किसानों ने क़र्ज़ के बोझ तले आत्महत्या कर ली। वहाँ के सत्ता हथियाने के अश्लील खेल से हताश होकर ये किसान दिल्ली आ गये। २५ वर्ष से लेकर ७५ वर्ष तक के पुरुष तथा महिलायें इस प्रदर्शन में शामिल हैं। दिल्ली की कठोर गर्मीं में कुछ किसान बीमार हो के तमिल नाडु वापस लौट गए और उनकी जगह कुछ और किसान आ गए। पिछले ४०दिनों से यह लोग जंतर मंतर पर शांति पूर्ण प्रदर्शन कर रहें हैं। कई नेताओं ने जंतर मंतर पर अपनी हाज़री भी दर्ज कराई पर अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इन्हें कोई भी राहत नहीं पहुंचाई गयी है।



जब तक मैंने यह वीडियो देखा, मन में एक टीस उठती रही, मेरा अस्तित्व इन तमिल किसानों की व्यथा देख कर मुझे कचोटता रहा। इन किसानों की पीड़ा देख कर लगा कोई कैसे ये सब होता देख कर चैन से सो सकता है। इस दौरान एक क्षण को जंतर मंतर जाने का फैसला भी कर लिया। फिर वीडियो ख़त्म हुआ और मैं रात्री भोज को चला गया। खाने में लज़ीज़ व्यंजन खाये, ठंडा पानी पिया और अपने वातानुकूलित कमरे में आकर अपने मुलायम गद्दे पर पसर गया। संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को मैंने आज बहुत करीब से महसूस किया। प्रतीत होता है के मेरे अंदर की मानवता शायद कहीं दूर दुबक कर चैन की नींद सो गयी है। हाँ! एक संतोष अवश्य है, इस भाव शून्यता के शिखर पर मुझे अकेलापन नहीं महसूस हो रहा है क्योंकि आप, मीडिया और भारत सरकार भी मेरे साथ यहीं हैं।

मीडिया अपने-अपने राजनैतिक मालिकों की गुलामी में, या फ़िर आईपीएल में व्यस्त है। आप या तो अपने में ही मसरूफ़ हैं या फिर अपने इष्ट नेता के दैवीय कारनामों से विशि भूत हैं। पर सरकार का इस चोटी पर होना कुछ समझ नहीं आया। चलिए हम और आप इनके नहीं पर यह सरकार तो इनकी है, सरकारी हुक्मरान तो इन लोगों का उद्धार करने के लिए ही बैठे हैं। अच्छा ! २०१९ के चुनावों में अभी वक़्त है और केंद्र की सत्ताधारी पार्टी का तमिल नाडु में कुछ ख़ास वोट बैंक नहीं है।


चलिये जाने दीजिये ! सुना है के कल शायद यह किसान अपना मल खायेंगे, समय मिला तो एक नज़र इस ख़बर को देख लीजियेगा वरना कल आईपीएल देख कर 'कोरबो लोड़बो जीतबो रे' गा लीजियेगा। वैसे भी खेती के दौरान आत्माहत्या तो अब व्यवसायजनित जोखिम है। 

जय हिन्द ! जय श्री राम !

1 comment:

  1. http://indiatoday.intoday.in/story/tamil-nadu-farmers-jantar-mantar-narendra-modi/1/936291.html

    Farmers end protest.

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